अहमदाबाद प्लेन हादसा, आरोप-एयरलाइन परिजन से वित्तीय जानकारी मांग रही

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नई दिल्ली। 04 जुलाई 2025 । अहमदाबाद एयरपोर्ट के पास हाल ही में हुए दर्दनाक प्लेन हादसे के बाद एक और विवाद खड़ा हो गया है। पीड़ित यात्रियों के परिजनों ने एयरलाइन कंपनी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि मुआवज़े से पहले एयरलाइन उनसे वित्तीय स्थिति और आय से जुड़ी व्यक्तिगत जानकारी मांग रही है।

घटना में शामिल विमान एक निजी एयरलाइन का था, जो नियमित घरेलू उड़ान के दौरान तकनीकी खराबी के चलते रनवे से फिसल गया था। इस हादसे में कई यात्री घायल हुए और कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है। हादसे के बाद जहां एक ओर राहत और बचाव कार्य तेज़ी से हुआ, वहीं अब पीड़ित परिवारों को दूसरी मानसिक पीड़ा से गुजरना पड़ रहा है।

पीड़ित परिजनों का आरोप

कई परिजनों ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि एयरलाइन की ओर से एक फॉर्म भेजा गया है, जिसमें आय प्रमाण पत्र, बैंक डिटेल्स, और संपत्ति से जुड़ी जानकारी मांगी जा रही है। परिजनों का कहना है कि यह प्रक्रिया न केवल अनुचित है बल्कि संवेदनहीन भी, क्योंकि घटना के बाद वे पहले ही गहरे सदमे में हैं।

एक यात्री की पत्नी ने कहा, “मेरे पति अभी ICU में हैं, और एयरलाइन हमसे पूछ रही है कि हमारी कुल सालाना आय कितनी है। क्या यह जरूरी है मुआवज़ा तय करने के लिए?”

कानूनी और सामाजिक प्रतिक्रिया

मानवाधिकार संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों ने इस रवैये की निंदा की है। कई वकीलों का मानना है कि मुआवज़ा तय करने का आधार पीड़ित की जान और चोट का मूल्यांकन होना चाहिए, न कि उनके पारिवारिक वित्त का।

कुछ संगठनों ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय और DGCA से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। वे चाहते हैं कि एयरलाइन को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए जाएं कि पीड़ित परिवारों से किसी भी तरह की गैर-जरूरी या व्यक्तिगत जानकारी ना मांगी जाए।

एयरलाइन की सफाई

विवाद बढ़ने पर एयरलाइन ने बयान जारी किया है कि यह प्रक्रिया केवल बीमा कंपनी की औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए है और किसी भी यात्री को मुआवज़ा देने में देरी नहीं की जाएगी। हालांकि, एयरलाइन ने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि यह जानकारी अनिवार्य है या ऐच्छिक।

परिजनों ने चेतावनी दी है कि अगर एयरलाइन अपना रुख नहीं बदलती, तो वे कानूनी कार्रवाई का सहारा लेंगे। साथ ही कई सामाजिक कार्यकर्ता और उपभोक्ता अधिकार समूह इस मामले को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की योजना बना रहे हैं।

यह घटना न केवल नागरिक सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि हादसों के बाद पीड़ितों के प्रति संवेदनशीलता कितनी ज़रूरी है।

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