• दिल्ली के पहले संभावित ‘क्लीन एयर ज़ोन’ की समीक्षा की
• कनॉट प्लेस, खान मार्केट और अन्य व्यस्त क्षेत्रों को भविष्य में CSR मॉडल के तहत विस्तार के लिए शामिल किया जा सकता है
• मॉर्निंग वॉक करने वालों और फ़िटनेस समूहों से लिया जाएगा फीडबैक
नई दिल्ली । 29 जून, 2025 । दिल्ली की वायु गुणवत्ता को बेहतर करने के लिए वैज्ञानिक उपायों की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा और PWD मंत्री व क्षेत्रीय विधायक प्रवेश साहिब सिंह ने आज नेहरू पार्क का दौरा किया। उन्होंने यहाँ ‘क्लीन एयर ज़ोन’ बनाने की संभावना का अध्ययन किया।
यह पहल दिल्ली का पहला ‘क्लीन एयर ज़ोन’ बनने की दिशा में एक शुरुआती अध्ययन का हिस्सा है। 85 एकड़ में फैले इस पार्क को पायलट साइट के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ 150 एडवांस एयर प्यूरिफायर लगाने की संभावना पर विचार किया जा रहा है। इन मशीनों को पहले ISBT, पेट्रोल पंपों और अन्य स्थानों पर टेस्ट किया गया है, जहाँ इन्होंने सीमित क्षेत्र में PM2.5 स्तर को घटाने में अच्छे नतीजे दिए।
निरीक्षण के दौरान पर्यावरण विभाग, NDMC और PWD के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। मंत्रीगण ने मॉर्निंग वॉक पर आए लोगों से बातचीत भी की, जिससे फीडबैक लेकर इस प्रस्ताव को बेहतर बनाया जा सके। इस अध्ययन का उद्देश्य यह जानना है कि क्या यह तकनीक बड़े पार्कों में AQI को स्थायी रूप से कम कर सकती है और क्या इससे आम लोगों को सुरक्षित वातावरण मिल सकता है।

सिरसा ने बताया “इस तकनीक ने सीमित स्तर पर अच्छे परिणाम दिखाए हैं, अब हम जानना चाहते हैं कि क्या यह बड़े क्षेत्रों में भी काम कर सकती है। हम लोगों से पूछेंगे कि क्या यह तकनीक सही है, और उनके फीडबैक के आधार पर ही निर्णय लिया जाएगा।”
प्रत्येक प्रस्तावित मशीन लगभग 9 फीट ऊँची होती है और एडवांस्ड फ़िल्ट्रेशन तकनीक का उपयोग करती है जो हवा से हानिकारक PM2.5 कणों को निकालती है। यदि भविष्य में यह परियोजना लागू होती है तो यह पार्क के उपयोगकर्ताओं को साल दर साल स्वच्छ हवा दे सकती है। लेकिन इसकी तैनाती पूरी तरह अध्ययन के नतीजों पर निर्भर करेगी।
सिरसा ने बताया कि सरकार फिलहाल इस तकनीक की वास्तविक परिस्थितियों में फिजिबिलिटी की जांच कर रही है। अगर यह प्रभावी और व्यावहारिक साबित होती है, तो Connaught Place, खान मार्केट और अन्य स्थानों में भी इसी तरह के ज़ोन बनाने पर विचार होगा। इन परियोजनाओं का क्रियान्वयन कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के माध्यम स किया जाएगा ताकि सरकार पर आर्थिक बोझ न आए।
PWD मंत्री प्रवेश साहिब सिंह, जो क्षेत्र के विधायक भी हैं, ने कहा, “माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में दिल्ली सरकार लगातार राजधानी को विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। मैं प्रधानमंत्री जी का धन्यवाद करता हूँ कि उन्होंने दिल्ली की रोड इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास और मरम्मत के लिए ₹1,000 करोड़ की सहायता दी है।”
उन्होंने यह भी कहा, “ सिरसा स्वयं हर विकास और प्रदूषण नियंत्रण अभियान की निगरानी करते हैं। उनकी प्रतिबद्धता अडिग है। हम सब मिलकर ‘विकसित दिल्ली’ के प्रधानमंत्री जी के सपने को साकार करने में जुटे हैं।”
यह प्रस्ताव दिल्ली सरकार के एनवायरनमेंट एक्शन प्लान 2025 का हिस्सा है, जिसमें लंबे समय से लंबित आर्टिफिशियल रेन परियोजना को पुनर्जीवित करना, रोज़ाना मशीनी सफाई, जल का छिड़काव, निर्माण स्थलों पर नियमों का सख्त पालन और एंटी-स्मॉग गन लगाना शामिल है। Ghazipur, Bhalswa और Okhla में लैंडफिल बायो-माइनिंग का काम तेज़ी से चल रहा है, ताकि वहाँ के कूड़े के पहाड़ों को स्थायी रूप से हटाया जा सके।
पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों से निपटने के लिए शहर के प्रवेश बिंदुओं पर ANPR (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट पहचान) कैमरे लगाए जा रहे हैं, जो पूरे साल GRAP नियमों के पालन में मदद करेंगे।
सिरसा ने कहा, “प्रदूषण से निपटने के लिए वैज्ञानिक सोच, प्रतिबद्धता और लगातार प्रयास ज़रूरी है। इसलिए हम पहले इस मॉडल का अध्ययन कर रहे हैं, फिर कोई निर्णय लेंगे।”
अगर यह अध्ययन सफल रहा, तो नेहरू पार्क में बना यह ‘क्लीन एयर ज़ोन’ दिल्ली के अन्य शहरी क्षेत्रों जैसे पार्क, स्कूल, बाज़ार और रिहायशी इलाकों में भी प्रदूषण नियंत्रण के लिए एक नई मिसाल बन सकता है।
