युवाओं की सक्रिय भागीदारी और जिज्ञासु दृष्टिकोण भारत के लोकतांत्रिक भविष्य की शक्ति का प्रतीक है – विजेन्द्र गुप्ता

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  • दिल्ली विधानसभा में शहरी शासन पर संवाद में शामिल हुआ युवा प्रतिनिधिमंडल
  • विजेंद्र गुप्ता ने छात्रों से किया संवाद, दिल्ली विधान सभा की ऐतिहासिक विरासत और चल रहे सुधारों से कराया परिचय

नई दिल्ली,23 जून 2025 । दिल्ली विधानसभा में आज नेशनल गवर्नेंस टूर 2025 पर आए देशभर के प्रतिष्ठित संस्थानों—आईआईटी, आईआईएम, एनएलयू और अन्य विश्वविद्यालयों के 28 राज्यों के 45 युवा छात्रों के प्रतिनिधिमंडल ने अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता से भेंट की। “शहरी शासन में विधायी पारदर्शिता और जवाबदेही को सुदृढ़ करना” विषय पर आयोजित संवाद में छात्रों ने दिल्ली में विधायी प्रक्रियाओं में जन-भागीदारी और संस्थागत निगरानी को लेकर विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।

अध्यक्ष गुप्ता ने युवाओं को संबोधित करते हुए लोकतंत्र में विधायी संस्थाओं की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित किया और उन्हें ईमानदारी तथा सेवा भावना से जनजीवन में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया। उन्होंने छात्र प्रतिनिधियों के योजनाबद्ध और लोकतांत्रिक शासन पर उनके दृष्टिकोण की सराहना की तथा 20 मिनट के संवाद में छात्रों के जिज्ञासापूर्ण प्रश्नों का उत्तर दिया।

गुप्ता ने कहा, “यह विधानसभा जनता की है। आपकी सक्रिय भागीदारी और जिज्ञासु दृष्टिकोण भारत के लोकतांत्रिक भविष्य की शक्ति का प्रतीक है।” उन्होंने बताया कि दिल्ली विधानसभा में विभिन्न सुधारात्मक कार्य चल रहे हैं। हाल ही में विधानसभा ने भारत सरकार की ऑडिट पैरा मॉनिटरिंग सिस्टम (APMS) को अपनाया है, जिससे नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा उठाए गए आपत्तियों की रियल-टाइम ट्रैकिंग संभव हो सकेगी। यह पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में एक बड़ा कदम है।

अध्यक्ष ने यह भी जानकारी दी कि विधानसभा परिसर में 500 किलोवाट की सौर ऊर्जा परियोजना स्थापित की जा रही है, जिसका जुलाई में पूर्ण होने का अनुमान है। इससे प्रतिवर्ष लगभग ₹2 करोड़ की विद्युत व्यय में बचत होगी। उन्होंने कहा कि यह पहल पर्यावरणीय स्थिरता और आर्थिक विवेकशीलता के प्रति विधानसभा की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

छात्रों को भारत के विधायी इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं से अवगत कराते हुए अध्यक्ष ने बताया कि 18 मार्च 1919 को दिल्ली में रोलेट एक्ट पारित हुआ था, जिसकी बहस के दौरान महात्मा गांधी दर्शक दीर्घा में उपस्थित थे और बाद में उन्होंने विधानसभा भवन के बाहर जनता को संबोधित किया था। उन्होंने इसे भारत की लोकतांत्रिक यात्रा में सिविल रेजिस्टेंस और जन-भागीदारी की परंपरा का प्रतीक बताया।

अंत में गुप्ता ने युवाओं का आह्वान किया कि वे भविष्य में लोकतांत्रिक मूल्यों, पारदर्शिता और जवाबदेही के प्रतिनिधि बनें और जन नेतृत्व तथा संस्थागत शासन के बीच सेतु की भूमिका निभाएं।

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