•दिल्ली भाजपा द्वारा सभी 14 जिलों में आयोजित किया गया जिला संगोष्ठी
नई दिल्ली, 23 जून 25 । दिल्ली भाजपा द्वारा आज डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस के अवसर पर दिल्ली के सभी 14 संगठनात्मक जिलों में संगोष्ठियों का आयोजन किया गया। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा के आवाहन पर आयोजित इन संगोष्ठियों में प्रदेश पदाधिकारियों ने डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन और उनके सिद्धांतों के बारे में कार्यकर्ताओं को बताया।
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने आज करोल बाग जिला में जिला कार्यालय और नई दिल्ली जिला में विपिन चन्द्रा पाल ऑडिटोरियम चितरंजन पार्क में आयोजित जिला संगोष्ठी को संबोधित किया।
दिल्ली भाजपा महामंत्री सांसद योगेन्द्र चंदोलिया ने पश्चिमी दिल्ली और नजफगढ़ जिला कार्यालय में आयोजित संगोष्ठी को संबोधित किया।
प्रदेश महामंत्री विष्णु मित्तल केशवपुरम एवं चांदनी चौक जिला के जिला कार्यालय में आयोजित संगोष्ठी को संबोधित किया।
सांसद बांसुरी स्वराज ने शहादरा एवं मयूर विहार जिला के जिला कार्यालय में आयोजित संगोष्ठी को संबोधित किया।
प्रदेश उपाध्यक्ष राजकुमार भाटिया ने उत्तर पूर्व एवं नवीन शाहदरा जिला के जिला कार्यालय में आयोजित संगोष्ठी को संबोधित किया।

विधायक पवन शर्मा ने महरौली जिला कार्यालय में आयोजित जिला संगोष्ठी को संबोधित किया।
राष्ट्रीय प्रवक्ता सरदार आर पी सिंह ने उत्तर पश्चिमी दिल्ली एवं बाहरी दिल्ली जिला के जिला कार्यालय में आयोजित संगोष्ठी को संबोधित किया।
भाजपा नेता प्रो. जगदीश मुखी ने दक्षिणी दिल्ली जिला कार्यालय में आयोजित जिला संगोष्ठी को संबोधित किया।
इस मौके पर वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि जनसंघ से भाजपा तक के सफर में डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों का सबसे महत्वपूर्ण भूमिका रही है और हमने कभी भी अपने विचारों के साथ समझौता नहीं किया। उन्होंने कहा कि डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जो सपने देखे थे और जिस अखंड भारत की सोच के साथ उन्होंने अपने विचारों को रखा था उन विचारों और सोच को पूरा करने का काम प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने किया है।
सचदेवा ने कहा कि डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने एक देश में दो विधान दो संविधान का विरोध किया था और उसको पूरा करने का काम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया जब उन्होंने जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाया। उन्होंने कहा कि आज 1947 में देश आजाद तो हो गया लेकिन उसके बाद देश को अखंडता की लड़ाई लड़नी पड़ी और इसके कोई परोधा थे तो वह डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी थे।
