नई दिल्ली,20 मई । सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बिटकॉइन ट्रेड को हवाला कारोबार की तरह ही अवैध व्यापार करार दिया। जस्टिस सूर्यकांत और एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कहा कि क्रिप्टोकरेंसी के लिए एक समानांतर अंडर-मार्केट है और यह अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि आप क्रिप्टोकरेंसी को रेगुलेट करने के लिए स्पष्ट नीति क्यों नहीं बनाते। बेंच ने केंद्र की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से कहा कि क्रिप्टोकरेंसी को रेगुलेट करके, सरकार व्यापार पर नजर रख सकती है।
बेंच ने केंद्र सरकार को याद दिलाया कि उसने लगभग दो साल पहले डिजिटल करेंसी को लेकर भारत की नीति पर स्पष्टता मांगी थी। इसके बावजूद सरकार इसे रेगुलेट करने में विफल रही। यह एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर आंखें मूंदने के समान है।
कोर्ट ने केंद्र से कहा, ‘आपसे कोई नहीं कह रहा है कि बिटकॉइन ट्रेड पर रोक लगा दीजिए, क्योंकि आपने पहले कहा था कि क्रिप्टोकरेंसी अवैध नहीं है और इस पर बैन लगाना अर्थव्यवस्था के लिए बुद्धिमानी नहीं होगी। बैन लगाने से शायद आप जमीनी हकीकत से आंखें मूंद लेंगे, लेकिन इसे रेगुलेट करने के बारे में क्या सोचा है?’
कोर्ट ने कहा- आरोपी पीड़ित है या प्रताड़ित करने वाला, पता नहीं सुप्रीम कोर्ट ने क्रिप्टोकरेंसी पर यह टिप्पणी गुजरात में अवैध बिटकॉइन ट्रेड के एक मामले में गिरफ्तार आरोपी शैलेश बाबूलाल भट्ट की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान की। शैलेश भट्ट पर कई राज्यों में क्रिप्टोकरेंसी से संबंधित धोखाधड़ी का आरोप है।
कोर्ट ने कहा कि वह यह पता नहीं लगा सकती कि आरोपी पीड़ित है या लोगों को प्रताड़ित करने वाला। दरअसल, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने दावा किया था कि आरोपी गुजरात में बिटकॉइन के सबसे बड़े व्यापारियों में से एक था और उसने हाई रिटर्न का वादा करके दूसरों के साथ धोखाधड़ी और किडनैपिंग की।
आरोपी शैलेश भट्ट के वकील मुकुल रोहतगी ने पहले तर्क दिया था कि भारत में बिटकॉइन ट्रेडिंग अवैध नहीं है, खासकर 2020 से जब सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय रिजर्व बैंक के उस सर्कुलर को रद्द कर दिया था, जिसने बैंकों को क्रिप्टो-संबंधित लेनदेन की सुविधा देने से रोक दिया था। उन्होंने तर्क दिया था कि क्रिप्टोकरेंसी को लेकर कानून के अभाव में भट्ट की गिरफ्तारी गलत थी।